अमिया झरे निराधार
टेर
अमिया झरे निराधार,
धार पर संत रमे,
किने केऊ मनड़ा री बात,
संत कोई सांभले…
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पकड़ चम्पा री डाल,
सुहागन क्यूं खड़ी,
कई थारो पीयो परदेश,
काई थारी सासु लड़ी… -
पियाजी सिधाया सतलोक,
संदेशों लिया खड़ी,
चालियो जा मुरख गिवार,
तुझे मेरी क्या पड़ी… -
दोय दोय दिवला संजोय,
पिलंग पर पोडती,
पिया बिना सुनी लागे सेज,
नेन भर रोवती… -
धरण गगन के बीच,
भवे दोय पंखिया,
गुरु मिलना रो जोग,
फरूखे डावी अंखिया… -
मान सरोवर तीर,
हंस आया पांवणा,
कह गया साहिब कबीर,
भंवर नहीं आवणा…